विद्यालय समय के बाद जनगणना कार्य करवाने पर संस्कृत शिक्षक परिषद् ने जताई आपत्ति

शिक्षकों का समय शिक्षण कार्य के लिए सुरक्षित रखा जाए, विद्यार्थियों के हितों से न हो समझौता : परिषद्।

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़- हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् ने शिक्षकों से विद्यालयीय समय के अतिरिक्त जनगणना कार्य करवाने के निर्देशों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। परिषद् का कहना है कि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और शिक्षक समुदाय सदैव इसके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाता रहा है, लेकिन शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार डालकर विद्यार्थियों की शिक्षा और शिक्षकों के अधिकारों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष कमलकांत, महासचिव अमनदीप, वित्त सचिव लोकपाल, संगठन मंत्री ललित शर्मा, संगठन सचिव दिनेश कुमार, राज्य महिला संयोजिका दीपिका कुमारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने जारी बयान में कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के अनुसार शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व शिक्षण कार्य है।

ऐसे में विद्यालय समय के बाद, अवकाश के दिनों में या निजी समय में व्यापक जनगणना कार्य करवाना न तो व्यावहारिक है और न ही शिक्षा व्यवस्था के हित में।
परिषद् ने कहा कि वर्तमान में शिक्षकों पर परीक्षाओं, मूल्यांकन, विभिन्न पोर्टलों पर डाटा अपलोड करने, नामांकन, छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण तथा अभिभावकों के साथ संवाद जैसे अनेक प्रशासनिक दायित्व पहले से ही हैं। ऐसे में अतिरिक्त समय में जनगणना कार्य सौंपना शिक्षकों पर असंगत कार्यभार बढ़ाने जैसा है। परिषद् ने यह भी कहा कि कार्य-जीवन संतुलन प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है और लगातार अतिरिक्त सरकारी कार्य लेने से शिक्षकों के स्वास्थ्य एवं पारिवारिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


संस्कृत शिक्षक परिषद् ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का हवाला देते हुए कहा कि नीति में भी शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से यथासंभव मुक्त रखने और उनके समय का उपयोग शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता सुधारने के लिए करने पर बल दिया गया है।
परिषद् ने सुझाव दिया कि यदि जनगणना कार्य के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन की आवश्यकता हो तो शिक्षक भर्ती परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों को यह दायित्व सौंपा जा सकता है, जिससे उन्हें आर्थिक सहयोग भी प्राप्त होगा।


परिषद् ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य से नहीं, बल्कि शिक्षकों से नियमित कार्यकाल के अतिरिक्त बिना पर्याप्त व्यवस्था और सुविधाओं के कार्य लेने की प्रक्रिया से है। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार, जनगणना विभाग तथा शिक्षा विभाग से मांग की है कि जनगणना कार्य यथासंभव विद्यालयीय समय में करवाया जाए, शिक्षकों के अतिरिक्त कार्यभार का वास्तविक आकलन किया जाए तथा विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।


परिषद् के राज्य मीडिया प्रभारी कुन्दन ने कहा कि शिक्षक समुदाय राष्ट्रहित के प्रत्येक कार्य में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह सहयोग शिक्षकों के अधिकारों, सेवा शर्तों और विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के साथ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

LIC

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