ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़- अर्की विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भ्यूंखरी के चवाहन गांव की रहने वाली डॉ. रीना शर्मा आज अमेरिका में पादप जैव-प्रौद्योगिकी, आणविक जीवविज्ञान और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।

उनका शोध कार्य आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल सुरक्षा, मिट्टी की सेहत और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
डॉ. रीना शर्मा का वैज्ञानिक सफर भारत से शुरू होकर अमेरिका के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों और कृषि जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक पहुंचा है। वर्तमान में वह कैलिफोर्निया स्थित एक कृषि जैव-प्रौद्योगिकी कंपनी में वैज्ञानिकों की टीम के साथ कार्यरत हैं। उनका कार्य आरएनए आधारित फसल सुरक्षा तकनीकों, पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और टिकाऊ कृषि प्रणालियों के विकास से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार डॉ. रीना शर्मा के पिता शंकर देव शर्मा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लगदाघाट में उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार की ओर से मिली प्रेरणा और शिक्षा के बल पर उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

डॉ. रीना शर्मा अमेरिका की प्रतिष्ठित ब्रुकहेवन राष्ट्रीय प्रयोगशाला में भी शोध कार्य कर चुकी हैं। यहां उन्होंने पौधों में पोषक तत्वों की कार्यप्रणाली, पर्यावरणीय तनाव तथा उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों पर अध्ययन किया। इसके अलावा उन्होंने कपास, जूट और केनाफ जैसी फसलों पर भी अनुसंधान किया है।

डॉ. शर्मा का मानना है कि भविष्य की कृषि केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर विकसित की जाएगी। इसी उद्देश्य से वह ऐसी तकनीकों पर कार्य कर रही हैं जो किसानों को सुरक्षित और टिकाऊ कृषि के बेहतर विकल्प प्रदान कर सकें।

अपने उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए डॉ. रीना शर्मा को हाल ही में “यंग साइंटिस्ट अवार्ड-2025” से सम्मानित किया गया है। वह युवाओं और शोधार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन भी दे रही हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल अर्की और हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय हैं।


