ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज। हिमाचल प्रदेश पेंशनरज संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार पेंशनरों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है और अपने वादों से लगातार मुकर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणा और वित्त विभाग की 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना में विरोधाभास पर सवाल उठाए हैं।

वर्मा ने कहा कि 15 अगस्त को की गई घोषणा के अनुसार क्लास-3 पेंशनरों को 35 प्रतिशत एरियर भुगतान किया जाना था, लेकिन वित्त विभाग की अधिसूचना में 40 हजार रुपये बेसिक पेंशन का राइडर लगाकर इसे 15 प्रतिशत के दायरे तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से करीब 20 प्रतिशत पेंशनरों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और कम्यूटेशन के बकाया भुगतान न किए जाने पर भी नाराजगी जताई। वर्मा ने कहा कि 18 अगस्त को जारी एरियर संबंधी अधिसूचना में कई विसंगतियां हैं और पेंशनरों के मूल वेतन एरियर के भुगतान का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त कर्मचारी को वर्ष 2020 के बाद का मामूली पेंशन एरियर ही मिलेगा, जबकि 2016 से 2020 तक संशोधित वेतनमान के तहत बनने वाले वास्तविक एरियर का अधिसूचना में कोई उल्लेख नहीं है।

वर्मा ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनरों को क्लास-1, क्लास-2 और क्लास-3 के आधार पर वर्गीकृत करने की प्रथा शुरू की गई है, जिससे बड़ी विसंगतियां पैदा हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त विभाग की 13 मार्च 2024 की अधिसूचना में उम्र के आधार पर पेंशनरों को 15, 18, 20 और 35 प्रतिशत के वर्गों में बांटने का प्रयास किया गया था, जबकि अब 18 अगस्त की अधिसूचना में क्लास के आधार पर एरियर भुगतान का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि 18 अगस्त की अधिसूचना में 13 मार्च 2024 की अधिसूचना का संदर्भ तक नहीं दिया गया है। उनके अनुसार, इस संबंध में पेंशनरज संयुक्त संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल जिला कोषाधिकारी शिमला से भी मिला। वर्मा ने बताया कि शिमला में करीब 3000 क्लास-3 और 800 क्लास-1 पेंशनरों को इसका लाभ मिलना था, लेकिन अधिसूचना में पिछली अधिसूचना का संदर्भ न होने के कारण करीब 800 पेंशनरों के लाभ से वंचित होने की आशंका है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वित्त सचिव को निर्देश देकर 18 अगस्त की अधिसूचना में तत्काल आवश्यक संशोधन करवाया जाए। साथ ही उन्होंने प्रदेश के कर्मचारी संगठनों से 15 प्रतिशत डीए व डीआर की बकाया किस्तों और 166 माह के एरियर के भुगतान को लेकर आवाज बुलंद करने तथा पेंशनरों के संघर्ष में सहयोग देने का आह्वान किया।

वर्मा ने कहा कि 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान पेंशनरज संयुक्त संघर्ष समिति सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और घेराव करेगी। आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने के लिए जल्द ही 18 संगठनों की बैठक बुलाई जाएगी। समिति के प्रदेश मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी भी इस दौरान मौजूद रहे।

