ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़– एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने राज्य अध्यक्ष सनी सेक्टा के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलसचिव के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर विभिन्न विषयों में एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र एवं समयबद्ध न्यायिक जांच की मांग की है। यह ज्ञापन विशेष रूप से विज्ञापन संख्या Rectt. 17/2019 तथा Rectt. 21/2020 के तहत गणित, अंग्रेजी, पत्रकारिता एवं जनसंचार, माइक्रोबायोलॉजी तथा समाजशास्त्र विषयों में हुई नियुक्तियों से संबंधित है।

एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई के परिसर सचिव मुकेश कुमार तथा परिसर उपाध्यक्ष आशीष कुमार ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट संख्या 4/2025 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 186 शिक्षकों की भर्तियों में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक किसी स्वतंत्र या न्यायिक जांच की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया है।

उन्होंने कहा कि एसएफआई सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त विश्वविद्यालय के अभिलेखों के आधार पर भर्ती मामलों की जांच कर रही है। संगठन का आरोप है कि जिन मामलों में विश्वविद्यालय के दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया अनियमितताएं सामने आई हैं, उनमें विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए। एसएफआई का कहना है कि यदि कथित अनियमित नियुक्तियों के कारण विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है तो उसका भार छात्रों पर फीस वृद्धि के रूप में नहीं डाला जाना चाहिए और प्रस्तावित अथवा लागू फीस वृद्धि तत्काल वापस ली जाए।

ज्ञापन में एसएफआई ने आरोप लगाया है कि जांचे गए पांच मामलों में यूजीसी विनियम-2018 के अनुभव, शोध प्रकाशन, स्क्रीनिंग तथा चयन प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों का प्रथम दृष्टया उल्लंघन सामने आया है। संगठन के अनुसार गणित, अंग्रेजी, पत्रकारिता एवं जनसंचार, माइक्रोबायोलॉजी तथा समाजशास्त्र विभागों में नियुक्त कुछ एसोसिएट प्रोफेसरों के अनुभव, यूजीसी-नेट, शोध प्रकाशनों तथा अतिथि संकाय (गेस्ट फैकल्टी) के अनुभव को पात्रता में शामिल किए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

एसएफआई ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन कुलपति द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 के कुछ प्रावधानों के विपरीत नियुक्तियों से संबंधित अधिकारों का प्रयोग किया गया। संगठन ने मांग की है कि सीएजी रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सभी मामलों की निष्पक्ष न्यायिक जांच करवाई जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो संबंधित नियुक्तियों की समीक्षा कर वैधानिक कार्रवाई की जाए, अनियमित नियुक्तियों के आधार पर दिए गए वेतन एवं अन्य वित्तीय लाभों की नियमानुसार वसूली की जाए तथा दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा, पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है तथा छात्रों के हित में फीस वृद्धि तत्काल वापस ली जानी चाहिए।

