ट्रांसपोर्टरों के हक की अनदेखी का आरोप, मांग पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी।
ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- सिविल सप्लाई सीमेंट परिवहन भाड़े में वर्षों से संशोधन न होने और डीज़ल की बढ़ी कीमतों का लाभ ट्रक ऑपरेटरों को नहीं मिलने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है। अर्की के पूर्व विधायक गोबिंद राम शर्मा ने शुक्रवार को जारी प्रेस बयान में सरकार से मांग की कि निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार डीज़ल मूल्य वृद्धि का लाभ तत्काल प्रभाव से परिवहन भाड़े में जोड़ा जाए, अन्यथा प्रदेशभर के ट्रांसपोर्टरों को साथ लेकर व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

गोबिंद राम शर्मा ने कहा कि सिविल सप्लाई सीमेंट परिवहन का भाड़ा आज भी वर्ष 2014 में निर्धारित ₹9.06 प्रति टन प्रति किलोमीटर की दर पर चल रहा है। इस दौरान डीज़ल, टायर, बीमा, स्पेयर पार्ट्स, मजदूरी तथा अन्य परिचालन खर्चों में कई गुना वृद्धि हुई है, लेकिन परिवहन भाड़े में कोई प्रभावी संशोधन नहीं किया गया। इससे ट्रक ऑपरेटरों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में डीज़ल का मूल्य ₹86.67 प्रति लीटर से बढ़कर ₹93.84 प्रति लीटर हो गया है, यानी ₹7.17 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार यह लगभग 3.3 प्रतिशत की वृद्धि बनती है और इसका लाभ तत्काल परिवहन भाड़े में दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्टर कोई अतिरिक्त रियायत नहीं मांग रहे, बल्कि केवल नियमों के तहत मिलने वाला अपना वैधानिक अधिकार चाहते हैं।

पूर्व विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में सीमेंट कंपनियों से ट्रांसपोर्टरों के लिए 13 पैसे प्रति टन प्रति किलोमीटर अतिरिक्त दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह भी आज तक लागू नहीं हो सका। कई बार सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष यह मामला उठाया गया, परंतु केवल आश्वासन ही मिले।
उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा जा रहा है। कई ऑपरेटर अपनी बात खुलकर रखने से भी हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन पर विभिन्न प्रकार के दबाव बनाए जाने की आशंका रहती है।

गोबिंद राम शर्मा ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय लेकर डीज़ल मूल्य वृद्धि के अनुरूप नया परिवहन भाड़ा लागू नहीं किया, तो प्रदेश के हजारों परिवहन परिवारों के हितों की रक्षा के लिए ट्रक ऑपरेटरों के साथ मिलकर बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की होगी ।

