ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़ । भाजपा किसान मोर्चा मंडल दाड़लाघाट के तत्वावधान में बरायली पंचायत के बरायली बूथ नंबर-32 में पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष पौधारोपण एवं प्राकृतिक खेती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पंचायत प्रधान कृष्ण चंद भट्टी का उपस्थित अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों, कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा लोगों को पर्यावरण को स्वच्छ एवं हरा-भरा बनाए रखने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों और प्राकृतिक खेती के लाभों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाकर भूमि की उर्वरता बढ़ाने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश संगठन मंत्री सिद्धार्थन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष रतन सिंह पाल, पूर्व विधायक अर्की गोविंद राम शर्मा, भाजपा किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष राकेश गौतम, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओम प्रकाश गांधी, मंडल महामंत्री भीम शर्मा एवं पुरुषोत्तम ठाकुर, मंडल उपाध्यक्ष कला ठाकुर, जिला परिषद सदस्य मीनाक्षी ठाकुर, बरायली पंचायत प्रधान कृष्ण चंद भट्टी, उपप्रधान प्रकाश चंद, बीडीसी सदस्य संगीता सोनी, प्रधान ग्राम पंचायत दाड़लाघाट श्याम चौधरी, चमाकड़ी पंचायत प्रधान नरेंद्र हांडा, दावटी पंचायत प्रधान हेत राम शर्मा, बीडीसी सदस्य सीता राम, उपप्रधान मांगू राजेश पुरी, कोटलू पंचायत से सागर शर्मा, चंडी पंचायत के उपप्रधान मदन ठाकुर, किसान मोर्चा अध्यक्ष जगदीश्वर शुक्ला, बंटू शुक्ला,महिला मोर्चा अध्यक्ष सुनीता ठाकुर, मंडल सचिव महेंद्र ठाकुर, मंडल कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश, युवा मोर्चा महामंत्री तरुण ठाकुर, रमेश ठाकुर, धर्मपाल धर्मा, संत राम, प्रेम लाल तथा किसान मोर्चा सचिव बंटू शुक्ला सहित अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता, किसान एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रगतिशील किसानों संत राम, निशांत, नरेंद्र एवं महेंद्र को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने किसानों की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

मुख्य अतिथि सिद्धार्थन ने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता है और इससे किसानों की लागत कम होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन “धरती का श्रृंगार करें, प्राकृतिक खेती को स्वीकार करें” के संदेश के साथ हुआ।



