पुणे के निगडी स्थित श्री गुरु गणेश विद्यामंदिर में पूर्व छात्रों का स्नेहमिलन, पुरानी यादें हुईं ताजा

संस्था के शताब्दी महोत्सव पर 1992 से 2002 तक के पूर्व छात्र हुए एकत्रित, विद्यालय के विकास में सहयोग देने का लिया संकल्प।

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज। श्री जैन विद्या प्रसारक मंडल के अंतर्गत संचालित निगडी स्थित श्री गुरु गणेश विद्यामंदिर माध्यमिक विद्यालय में संस्था के शताब्दी महोत्सव के उपलक्ष्य में पूर्व छात्रों का स्नेहमिलन उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। इसमें वर्ष 1992 से 2002 के बीच विद्यालय में अध्ययन करने वाले पूर्व छात्रों ने भाग लिया। इस दौरान सभी ने अपने स्कूली जीवन की यादों को ताजा किया और एक-दूसरे के साथ पुराने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य हनुमंत मारकड ने संस्था की सौ वर्षों की शैक्षणिक यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने संस्था की उपलब्धियों और शिक्षा के क्षेत्र में उसके योगदान पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर पूर्व छात्र एडवोकेट गजानन खैरे, कंप्यूटर इंजीनियर स्मिता मुथा, उद्यमी पूजा लोढा, केतकी कुंभार, डॉ. अश्विनी पाटिल, उद्यमी गिरीश धांडे, सामाजिक कार्यकर्ता आशीष बागुल, उद्यमी स्वप्निल शाह, मंदार गायकवाड़, रवींद्र जवळेकर और विशाल बिरारीस सहित अन्य पूर्व छात्रों ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यालय से जुड़ी यादों और वहां से मिले संस्कारों को अपने जीवन की महत्वपूर्ण पूंजी बताया।

विद्यालय के विकास में सहयोग देने का आह्वान

पूर्व छात्र एडवोकेट गजानन खैरे ने कहा कि विद्यालय में वापस आने पर पुराने दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं। स्कूल से मिले संस्कार और शिक्षा ने ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का आधार दिया। उन्होंने पूर्व छात्रों से विद्यालय के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए दान और सहयोग की भावना के साथ संस्था के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

पूर्व शिक्षकों की मौजूदगी ने बनाया यादगार अवसर

स्नेहमिलन में विद्यालय के पूर्व शिक्षक धोंडीबा हांडे और उमाकांत काले भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। लंबे समय बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों के एक साथ मिलने से कार्यक्रम भावनात्मक और यादगार बन गया। संस्था प्रमुख सुरेश और शिक्षक सुभाषक ने कार्यक्रम के आयोजन में समन्वय किया, जबकि उज्वला कोल्हटकर ने मंच संचालन किया। संस्था के शताब्दी महोत्सव के अवसर पर आयोजित इस स्नेहमिलन ने पूर्व छात्रों को अपने विद्यालय से दोबारा जुड़ने और उसकी शैक्षणिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया।

LIC

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