ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़- अर्की विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भ्यूंखरी के गांव चवाहन की मूल निवासी तथा अमेरिका के कैलिफोर्निया में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. रीना शर्मा ने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेकर भारत-अमेरिका वैज्ञानिक सहयोग, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने विषय पर आयोजित कार्यशाला में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं तथा उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना तथा भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में विचार-विमर्श करना था।

डॉ. रीना शर्मा ने नवाचार, अनुसंधान को व्यवहारिक उपयोग में बदलने, प्रौद्योगिकी विकास तथा भारत-अमेरिका वैज्ञानिक सहयोग से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य प्रयोगशालाओं में हुए शोध को समाज और उद्योग के लिए उपयोगी समाधान में परिवर्तित करना है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा और अनुसंधान की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार आधारित तकनीकें भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगी। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता वैज्ञानिक सहयोग नई तकनीकों के विकास तथा ज्ञान के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यशाला के संयोजक डॉ. प्रदोष नाथ भट्टाचार्य सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अनुसंधान, उद्योग और उद्यमिता के बीच मजबूत समन्वय पर बल दिया। इस दौरान प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण, विपणन रणनीति, नव उद्यम, कौशल विकास तथा उद्योग-शैक्षणिक संस्थानों की साझेदारी जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
डॉ. रीना शर्मा की इस उपलब्धि पर अर्की क्षेत्र में खुशी का माहौल है। क्षेत्र के लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



