ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- अकाल कॉलेज ऑफ नर्सिंग हिमाचल प्रदेश की स्नातकोत्तर न्यूरोसाइंस नर्सिंग की छात्रा मुस्कान ठाकुर ने “एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए देश में समान, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केवल बीमारी न होने का नाम नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से पूर्ण स्वस्थ रहने की अवस्था है। बावजूद इसके आज भी भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में भारी असमानता देखने को मिलती है।

मुस्कान ठाकुर ने कहा कि देश में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” और “एक राष्ट्र, एक शिक्षा” जैसे विषयों पर चर्चा होती है, लेकिन “एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली” जैसे महत्वपूर्ण विषय को अब भी पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल पाई है। उनका मानना है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर नागरिक को समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए।

उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, जिसमें स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधा का अधिकार भी शामिल है। यदि किसी मरीज को समय पर इलाज, सुरक्षित अस्पताल या जरूरी सुविधाएँ नहीं मिलतीं, तो यह केवल प्रशासनिक कमी नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने सरकारी अस्पतालों और आधुनिक हवाई अड्डों की सुविधाओं की तुलना करते हुए कहा कि जहाँ हवाई अड्डों पर वातानुकूलित लाउंज, स्वच्छ शौचालय और आरामदायक व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं, वहीं कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को साफ बिस्तर, पीने का पानी और उचित वेंटिलेशन जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं मिल पातीं।

कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरी लहर के दौरान हजारों लोगों की मौत इलाज की कमी से नहीं, बल्कि ऑक्सीजन, आईसीयू बेड और समय पर सहायता न मिलने के कारण हुई। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता की गंभीर तस्वीर सामने आई।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भी कई गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं, जिसके कारण मरीजों को कंधों पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है। उनका कहना था कि “गांव में रहना किसी की मौत की वजह नहीं बनना चाहिए, सड़क सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जीवन की डोर है।

मुस्कान ठाकुर ने निजी अस्पतालों में बढ़ते इलाज के खर्च पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं बल्कि हर नागरिक का मूल अधिकार है और निजी अस्पतालों की फीस व इलाज के खर्च पर उचित नियंत्रण होना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि देश में ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जाए जिसमें पूरे देश में समान स्वास्थ्य सुविधाएँ, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड, सस्ती दवाइयाँ, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ और ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हों।

उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, जर्मनी, जापान और थाईलैंड जैसे देशों ने मजबूत और एकीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है। भारत में आयुष्मान भारत योजना जैसी पहल सराहनीय है, लेकिन अब भी करोड़ों लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति या उसके राज्य पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। हर नागरिक को समान उपचार, समान सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही एक मजबूत और विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी पहचान होते हैं।


