ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- जिला परिषद सोलन के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद के चुनाव के बाद डुमैहर जिला परिषद वार्ड से तीसरी बार निर्वाचित सदस्य आशा परिहार एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। चुनाव परिणाम के बाद उनके समर्थकों में मायूसी देखी जा रही है, जबकि सोशल मीडिया पर भी विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कई दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि तीन बार जिला परिषद सदस्य चुनी जा चुकीं आशा परिहार के अनुभव को देखते हुए उन्हें जिला परिषद उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, चुनाव परिणाम इसके विपरीत रहे।

जिला परिषद में चार बार निर्वाचित सदस्य शीला अध्यक्ष बनने में सफल रहीं, जबकि तीसरी बार जीत दर्ज करने वाली आशा परिहार उपाध्यक्ष पद तक भी नहीं पहुंच सकीं। वर्तमान जिला परिषद में आशा परिहार ही ऐसी सदस्य हैं जिन्हें पिछली जिला परिषद में भी कार्य करने का अनुभव है।

चुनाव परिणाम के बाद सोशल मीडिया पर कई समर्थकों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि यह उनके लिए “दिल तोड़ने वाला क्षण” है। समर्थकों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि आशा परिहार के अनुभव को देखते हुए उन्हें उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी।

राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि आशा परिहार ने अपने शुरुआती दो चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतकर अपनी मजबूत जनाधार का परिचय दिया था। इस बार उन्हें पार्टी का टिकट मिला, लेकिन उपाध्यक्ष पद के चयन में उनका नाम आगे नहीं आ सका। यही कारण है कि उनके समर्थकों के बीच इसे राजनीतिक अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित सदस्यों के मतदान के आधार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत संपन्न हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है।

