अर्की में मामा के.के. भारद्वाज ने प्रतिमा पर किया माल्यार्पण, नोएडा स्थित ‘शहीद कैप्टन विजयंत थापर चौक’ पर परिवार ने दी श्रद्धांजलि।
ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- कारगिल युद्ध के अमर वीर, वीर चक्र से सम्मानित शहीद कैप्टन विजयंत थापर की पुण्यतिथि पर पूरे देश ने उन्हें श्रद्धा और गर्व के साथ नमन किया। एक ओर उनके ननिहाल अर्की में मामा के.के. भारद्वाज ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपने वीर भांजे को श्रद्धासुमन अर्पित किए, वहीं नोएडा स्थित ‘शहीद कैप्टन विजयंत थापर चौक’ पर उनकी माता तृप्ता थापर, पिता कर्नल वी.एन. थापर, छोटे भाई विजयेन्द्र थापर तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने पुष्पांजलि अर्पित कर देश के वीर सपूत को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

अर्की में मामा के.के. भारद्वाज की आँखों में अपने वीर भांजे की यादें साफ झलक रही थीं। उन्होंने कहा कि विजयंत का अर्की से विशेष लगाव था। जब भी अवसर मिलता, वह अपने ननिहाल अवश्य आते थे और परिवार व क्षेत्र के लोगों से आत्मीयता से मिलते थे। उन्होंने कहा कि विजयंत ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम सदैव युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि भांजा आज भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसका नाम और उसका बलिदान हमेशा अमर रहेगा।

उधर, नोएडा से उनकी माता तृप्ता थापर ने अपने बेटे की स्मृतियों को साझा करते हुए ऐसा भावुक संदेश लिखा जिसने हर भारतीय की आँखें नम कर दीं। उन्होंने लिखा, “कल रात मेरे बेटे कैप्टन विजयंत थापर ने देश की आन, बान और शान की रक्षा करते हुए अपना कर्तव्य निभाया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 29 जून 1999 का खूबसूरत सूर्योदय और उसके बाद का हर सवेरा उसके भाग्य में नहीं था। फिर भी उसका अदम्य साहस, उसका बलिदान और उसकी अमर विरासत आज भी देश के सैनिकों और युवाओं को प्रेरित करती है। बेटा, तुम पर हमें हमेशा गर्व रहेगा। तुम्हें अनंत प्रेम।“

एक माँ के इन शब्दों में वर्षों का दर्द, बेटे की याद, उसके खोने की टीस और देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान पर गर्व – सब कुछ एक साथ महसूस होता है। यह केवल श्रद्धांजलि का संदेश नहीं, बल्कि उस माँ के हृदय की वेदना है जिसने अपना लाल भारत माँ की रक्षा के लिए खो दिया, लेकिन आज भी उसके बलिदान पर गर्व करती है।

मात्र 22 वर्ष की आयु में कैप्टन विजयंत थापर ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास उम्र से नहीं, बल्कि जज़्बे, साहस और बलिदान से लिखा जाता है। कुछ लोग 22 वर्ष की उम्र में अपने सपनों को संवारने में लगे होते हैं, लेकिन कुछ विजयंत थापर बनकर अपने सपनों को मातृभूमि के चरणों में अर्पित कर अमर हो जाते हैं। अपने परिवार की पाँचवीं पीढ़ी के सैनिक के रूप में उन्होंने कारगिल की दुर्गम तोलोलिंग और नोल की चोटियों पर अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

गौरतलब है कि कारगिल युद्ध के दौरान द्रास सेक्टर में दुश्मन के कब्जे वाले महत्वपूर्ण ठिकानों को मुक्त कराने के अभियान में कैप्टन विजयंत थापर ने असाधारण वीरता और नेतृत्व का परिचय दिया। 29 जून 1999 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनके अद्वितीय साहस के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया। उनका जीवन और बलिदान आज भी भारतीय सेना के जवानों और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का अमर स्रोत है।

अर्की क्षेत्र के लिए भी यह गर्व का विषय है कि शहीद कैप्टन विजयंत थापर की माता तृप्ता थापर का मायका अर्की में है। उनकी पुण्यतिथि पर एक ओर ननिहाल में मामा ने अपने वीर भांजे को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी, तो दूसरी ओर नोएडा में माता-पिता और पूरे परिवार ने उनके स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। माँ के हृदय की वेदना, मामा का अपने भांजे के प्रति स्नेह और पूरे राष्ट्र का गर्व-इन सभी भावनाओं ने एक बार फिर देश को यह एहसास कराया कि शहीद कभी नहीं मरते, वे भारत माँ की मिट्टी, तिरंगे की शान और करोड़ों देशवासियों के हृदय में सदैव अमर रहते हैं। उनकी अमर गाथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान की प्रेरणा देती रहेगी।

