मॉल रोड का अविस्मरणीय मार्शल:मांजू के स्वर्गीय कांशीराम शर्मा को आज भी याद करता है शिमला

योगेश चौहान//दैनिक हिमाचल न्यूज- व्यक्ति भले ही इस दुनिया से विदा हो जाए, लेकिन उसके अच्छे कर्म और समाज के प्रति समर्पण उसे लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रखते हैं। उपमंडल अर्की की ग्राम पंचायत पलोग (मांजू) के नेर गांव के निवासी स्वर्गीय कांशीराम शर्मा इसका जीवंत उदाहरण हैं। वर्षों पहले पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त होकर इस दुनिया को अलविदा कह चुके कांशीराम शर्मा की सेवा भावना, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय व्यवहार को आज भी शिमला के लोग सम्मान के साथ याद करते हैं।


हाल ही में हिमाचल प्रदेश पुलिस के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हिमांशु मिश्रा द्वारा लिखे गए एक लेख “Kanshi Ram, the unforgettable Mall Road Marshal” में स्वर्गीय कांशीराम शर्मा के व्यक्तित्व और कार्यशैली का भावपूर्ण उल्लेख किया गया है। लेख में उन्हें शिमला की मॉल रोड का “अविस्मरणीय मार्शल” बताया गया है, जिसने अपने कर्तव्य पालन और जनसेवा से लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।


1990 के दशक में मॉल रोड स्थित पुलिस सहायता कक्ष (पीएआर) में उपनिरीक्षक के रूप में तैनात कांशीराम शर्मा पर्यटकों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। वे केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं थे, बल्कि लोगों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान करने में भी अग्रणी रहते थे। पर्यटकों को सही मार्गदर्शन देना, देर रात तक सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखना और छोटे-छोटे विवादों को आपसी समझदारी से सुलझाना उनकी पहचान बन गया था।


लेख में उल्लेख है कि उनकी कार्यशैली इतनी प्रभावशाली थी कि मॉल रोड के व्यापारी और स्थानीय लोग उन पर अटूट विश्वास करते थे। उनकी सख्ती में अनुशासन था तो व्यवहार में आत्मीयता। यही कारण था कि जब उनके तबादले की चर्चा हुई तो मॉल रोड व्यापार मंडल ने इसका विरोध करते हुए उन्हें मॉल रोड की शान बताया था।


स्वर्गीय कांशीराम शर्मा के बड़े पुत्र अनिल शर्मा ने जब यह लेख अपने परिचितों और गांववासियों के साथ साझा किया तो नेर गांव सहित पूरे मांजू क्षेत्र में भावनाएं उमड़ पड़ीं। गांव के बुजुर्गों और उनके समकालीन लोगों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि कांशीराम शर्मा ने अपने जीवन में ईमानदारी, कर्तव्य और सेवा के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी प्रेरणास्रोत हैं।


स्वर्गीय कांशीराम शर्मा के परिवार में दो पुत्र हैं। बड़े पुत्र अनिल शर्मा निजी क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि छोटे पुत्र नीरज शर्मा एसजेवीएन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परिवार और क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कांशीराम शर्मा ने अपने कर्मों से जो सम्मान अर्जित किया, वही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।
शिमला की मॉल रोड पर उनकी सेवाओं की गूंज आज भी सुनाई देती है। यही कारण है कि वर्षों बाद भी जब उनका नाम लिया जाता है तो लोगों की आंखों में सम्मान और स्मृतियों की चमक दिखाई देती है। स्वर्गीय कांशीराम शर्मा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

LIC

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