अर्की अस्पताल मौत मामला पहुंचा राजभवन, निष्पक्ष जांच की मांग

12 एमएम पथरी के ऑपरेशन के लिए गई थी सीमा शर्मा, परिजनों को मिला शव; राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन ।।

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़ –  अर्की नागरिक अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन के दौरान हुई सीमा शर्मा की मौत का मामला अब राजभवन पहुंच गया है। मृतका के पति हंस राज शर्मा सहित परिजनों ने महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में परिजनों ने बताया कि 44 वर्षीय सीमा शर्मा को केवल 12 एमएम की पथरी की समस्या थी। चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें अर्की अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि यह एक सामान्य ऑपरेशन होगा और कुछ दिनों में वह स्वस्थ होकर घर लौट आएंगी, लेकिन ऑपरेशन के बाद परिस्थितियां अचानक बदल गईं।परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के बाद उन्हें मरीज की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में सीमा शर्मा को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से आईजीएमसी शिमला रेफर कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि इस दौरान न तो उन्हें विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया गया और न ही स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया गया। पति हंस राज शर्मा ने बताया कि जब परिवार आईजीएमसी पहुंचा तो उन्हें सीमा शर्मा के निधन की सूचना दी गई। उन्होंने कहा कि जिस पत्नी को वे उपचार के लिए अस्पताल लेकर गए थे, उसका शव वापस मिला। परिवार का कहना है कि आज तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान ऐसा क्या हुआ, जिससे सीमा शर्मा की जान चली गई। ज्ञापन में परिजनों ने आरोप लगाया कि बाद में उनसे पोस्टमार्टम न करवाने संबंधी लिखित बयान लिया गया। उनका कहना है कि उस समय वे गहरे सदमे में थे और परिस्थितियों को समझने की स्थिति में नहीं थे। परिवार ने यह भी दावा किया कि अंतिम संस्कार के दौरान सीमा शर्मा की पीठ पर नीले निशान दिखाई दिए, जिससे उनके संदेह और गहरा गए। परिजनों ने राज्यपाल को बताया कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने पूछा कि यदि ऑपरेशन किया गया था तो उससे संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड परिवार को क्यों नहीं दिए गए, मरीज को किस स्थिति में रेफर किया गया और उपचार के दौरान क्या-क्या चिकित्सीय कदम उठाए गए।परिवार ने मांग की कि मामले की जांच स्थानीय स्तर के बजाय स्वतंत्र विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से करवाई जाए। उन्होंने जांच समिति में अर्की और सोलन के स्थानीय चिकित्सकों को शामिल न करने की मांग करते हुए कहा कि इससे जांच की निष्पक्षता बनी रहेगी। साथ ही ऑपरेशन, उपचार और रेफरल प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने तथा किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की गई। परिजनों ने कहा कि यह मामला केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर आम जनता के भरोसे से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निष्पक्ष जांच के माध्यम से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।राजभवन में ज्ञापन सौंपते समय परिवार के सदस्य भावुक नजर आए। उनका कहना था कि यदि अस्पताल प्रशासन की ओर से समय रहते संतोषजनक जवाब और पारदर्शिता दिखाई जाती, तो उन्हें न्याय की गुहार लेकर राजभवन का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ता।

LIC

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