ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज :- जिला सोलन की ग्राम पंचायत पट्टा बरावरी के प्राचीन श्री दुर्गा माता मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के सप्तम दिवस में पधारे हुए विश्व विख्यात कथा व्यास श्रद्धेय श्री शशांक सिंह कौशल जी महाराज ने उपस्थित जनसमूह को देवी की कथा से अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि दुर्गम नामक दैत्य के अत्याचार से जब सारे के सारे वेद और मंत्र लुप्त हो गए थे तो यज्ञ नष्ट हो गए यज्ञ के नष्ट होने से देवों को उनका भाग नहीं मिल पाता था जिस कारण वर्षा आदि नहीं हो पाती थी।

ऐसे समय में जब तीनो लोक में हाहाकार मचा तो देवों ने भगवती जगदंबा की उपासना की भगवती एक दिव्य स्वरुप में प्रगति जिसमें देवी के हजारों नेत्र थे और उनकी आंखों से लगातार जल बहता रहा जिससे देवी का यह स्वरूप शताक्षी कहलाया देवी ने हाथ में अस्त्र-शस्त्र की जगह विविध प्रकार की साग सब्जियां पकड़ी हुई थी।

जिस कारण देवी शाकंभरी कहलाए और अंत में देवी ने जब दुर्गम का वध किया तो दुर्गम का वध करने से वह दुर्गा कहलाए उन्होंने देवी गीता के ऊपर चर्चा करते हुए बताया कि जिस प्रकार श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया वह श्रीमद्भगवद्गीता कहलाया उसी प्रकार भगवती जगदंबा ने हिमालय राज को उपदेश दिया जो देवी गीता कहलाया इसके अंदर देवी ने अपने स्वरूप पूजन और स्थान आदि का वर्णन करते हुए बताया है कि मैं ज्वालामुखी हिंगलाज मां त्रिपुर तुलजापुर करवीर आदि स्थानों में हमेशा रहती हूं और आसाम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या महा शक्ति पीठ है जो मेरा सबसे प्रिय स्थान है।




