शिमला में संघ के शताब्दी वर्ष पर विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन पर दिया जोर।
ब्यूरो,दैनिक हिमाचल न्यूज- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिमला जिले के केशव नगर की ओर से रविवार को विजयादशमी उत्सव एवं संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के प्रांत संघचालक प्रो. (डॉ.) वीर सिंह रांगड़ा ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी एवं स्व-बोध और नागरिक कर्तव्यों सहित पंच परिवर्तन के माध्यम से सशक्त एवं संगठित भारत का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार करना नहीं, बल्कि संस्कारवान व्यक्ति, सशक्त परिवार, समरस समाज और शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करना है।

प्रो. रांगड़ा ने कहा कि सामाजिक समरसता का उद्देश्य समाज में जाति, वर्ग और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर आपसी आत्मीयता और समानता की भावना को मजबूत करना है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जल संरक्षण, पौधारोपण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना जरूरी है। वहीं, स्वदेशी एवं स्व-बोध के माध्यम से अपनी संस्कृति, परंपराओं और स्वदेशी उत्पादों के प्रति गौरव का भाव जागृत करने का आह्वान किया। उन्होंने नागरिक कर्तव्यों को भी राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए अनुशासन, स्वच्छता, कानून के सम्मान और राष्ट्रहित में योगदान देने पर जोर दिया।

कुटुंब प्रबोधन पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि परिवार भारतीय संस्कृति की मूल इकाई है। परिवारों में संवाद, आत्मीयता और संस्कारों का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार मजबूत होगा तो समाज मजबूत होगा और सशक्त समाज से ही राष्ट्र का विकास संभव है। उन्होंने स्वयंसेवकों से पंच परिवर्तन को केवल विचारों तक सीमित न रखते हुए अपने दैनिक जीवन, परिवार और समाज में व्यवहार के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपद्धति का उल्लेख करते हुए प्रो. रांगड़ा ने कहा कि संघ की शाखाओं, स्वयंसेवकों की दिनचर्या, अनुशासन, संगठनात्मक व्यवस्था और सामाजिक सेवा के कार्यों का अध्ययन किया जाता है। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि उनकी राष्ट्रभक्ति, समाज की एकता और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के प्रति समर्पण आज भी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 1925 में स्थापित संघ अपने शताब्दी वर्ष में समाज संगठन और राष्ट्रसेवा के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए प्रो. रांगड़ा ने कहा कि भारत को आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी शक्तियां भारत में अस्थिरता पैदा करने और सत्ता परिवर्तन के प्रयासों में लगी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मंसूबे सफल नहीं होंगे, क्योंकि आज का भारत संगठित, संतुलित, आत्मविश्वासी और शक्तिशाली है।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासित पथ संचलन निकाला। उत्सव में स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए संगठन, सामाजिक एकता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।

