ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। श्रीरामलीला जनकल्याण समिति के तत्वावधान में राजदरबार परिसर में आयोजित कथा के प्रथम दिवस कथा व्यास अरुण शर्मा ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य का वर्णन सुनाया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

कथा व्यास अरुण शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का भाव जागृत होता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और कथा श्रवण आत्मिक शांति एवं जीवन कल्याण का सरल मार्ग है।

उन्होंने भक्ति देवी और उनके पुत्र ज्ञान एवं वैराग्य का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कलियुग के प्रभाव से भक्ति कमजोर हो गई थी और ज्ञान-वैराग्य वृद्ध अवस्था को प्राप्त हो गए थे। भक्ति देवी ने नारद जी के समक्ष अपनी व्यथा रखी। नारद जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पुनः जागृत हो सकते हैं। सनकादि ऋषियों के माध्यम से भागवत कथा के आयोजन और कथा श्रवण के प्रभाव से ज्ञान-वैराग्य के पुनः युवा होने का प्रसंग भी सुनाया गया।

कथा के दौरान राजा परीक्षित को मिले श्राप और उनके द्वारा शुकदेव मुनि से भागवत कथा श्रवण का प्रसंग भी सुनाया गया। कथा व्यास ने कहा कि राजा परीक्षित को जब ज्ञात हुआ कि उनके जीवन के केवल सात दिन शेष हैं, तो उन्होंने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर अंतिम समय भगवान की भक्ति और कथा श्रवण में समर्पित कर दिया।

समिति प्रधान रितेश जोशी ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर भागवत अमृत कथा का श्रवण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार कथा आयोजन में सहयोग एवं दान कर पुण्य लाभ प्राप्त करें।



