ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- हिमाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार को विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। खास बात यह रही कि इस बार बजट का आकार पिछले वर्ष के 58,514 करोड़ रुपये के मुकाबले 3,586 करोड़ रुपये कम रखा गया है। सरकार ने इसे कठिन वित्तीय परिस्थितियों में तैयार बजट बताया है, जबकि विपक्ष ने कई घोषणाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बजट भाषण में महिलाओं, गरीब परिवारों, मानदेयभोगियों, ग्रामीण वर्ग और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े तबकों पर विशेष फोकस रखा। बजट की सबसे प्रमुख घोषणाओं में एक लाख गरीब परिवारों की पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने का ऐलान शामिल है। इसके साथ ही इन्हीं परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा भी की गई है। सरकार ने इसे जरूरतमंद परिवारों को राहत देने वाला कदम बताया है।

बजट में विभिन्न श्रेणियों के मानदेयभोगियों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। मिड डे मील वर्कर्स, जल रक्षक, एमटीडब्ल्यू, लोक निर्माण विभाग के एमटीडब्ल्यू, पंचायत चौकीदार, राजस्व चौकीदार और एसएमसी के मानदेय में 500 रुपये बढ़ोतरी की गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले से निचले स्तर पर काम कर रहे हजारों कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के लिए भी नई पहल का संकेत दिया है। बजट में विधवाओं और अनाथों के कल्याण के लिए संसाधन जुटाने हेतु पेट्रोल और डीजल पर 5 रुपये प्रति लीटर तक सेस लगाने का प्रस्ताव सामने आया है। सरकार का तर्क है कि इससे कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को वित्तीय आधार मिल सकेगा।

बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने का असर पड़ा है। सरकार ने इसे पहाड़ी राज्य हिमाचल के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बताया। इसी मुद्दे को लेकर सदन में हंगामा भी हुआ और विपक्ष ने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाए।

सरकार की नजर में यह बजट सीमित संसाधनों के बीच राहत, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण पर आधारित है। सरकार का दावा है कि कठिन आर्थिक हालात के बावजूद महिलाओं, गरीब परिवारों और कम आय वाले वर्गों को प्राथमिकता दी गई है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि घोषणाएं आकर्षक जरूर हैं, लेकिन पिछली कई बजट घोषणाएं अब तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकीं, इसलिए इस बजट की असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी।

कुल मिलाकर वर्ष 2026-27 का हिमाचल बजट ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकार वित्तीय दबाव, सीमित संसाधन और जनता की अपेक्षाओं—तीनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। महिलाओं को प्रतिमाह सहायता, गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली और विभिन्न वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी जैसी घोषणाओं ने बजट को आम जनता के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि ये घोषणाएं कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं।


