ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज : प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा सलाहकारों तथा निगम-बोर्डों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों से कैबिनेट रैंक वापस लेने और छह माह के लिए वेतन में 20 प्रतिशत कटौती के निर्णय को देर से लिया गया, लेकिन सराहनीय कदम बताया है।

जारी प्रेस वक्तव्य में उन्होंने कहा कि सरकार को आर्थिक सुधार के लिए यह निर्णय पहले लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि निगमों, बोर्डों और विभागों में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सलाहकारों की नियुक्तियों से सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ा है, जिससे सरकार को नुकसान हुआ है।
उन्होंने सुझाव दिया कि आर्थिक सुधार के लिए सरकार को ऐसे सभी पदों को समाप्त करने पर भी विचार करना चाहिए। साथ ही विधायकों, मंत्रियों, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर और मुख्यमंत्री के वेतन-भत्तों को बंद कर केवल मानदेय देने जैसे कड़े कदम उठाने की आवश्यकता बताई। इसके अतिरिक्त विभागों, बोर्डों और निगमों में सेवा विस्तार समाप्त करने की भी मांग की गई।

सुरेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री से अपील की कि 21 मार्च को पेश होने वाले वर्ष 2026-27 के बजट में पेंशनरों और कर्मचारियों की लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए पर्याप्त प्रावधान किया जाए। उन्होंने बताया कि समिति के 18 संगठनों द्वारा सौंपे गए 14 सूत्रीय मांग पत्र को भी जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो 30 मार्च 2026 को शिमला में प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और विधानसभा का घेराव भी होगा।
ठाकुर ने कहा कि हाल ही में भारी बारिश के बावजूद प्रदेश के 12 जिलों में पेंशनरों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जो केवल एक संकेत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसमें गिरफ्तारियां और जेल भरो आंदोलन भी शामिल हो सकते हैं।



