ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद का राज्यस्तरीय त्रैवार्षिक अधिवेशन एवं निर्वाचन समारोह रविवार को अर्की के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बथालंग में भव्यता और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों शिमला, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, चम्बा, कांगड़ा और हमीरपुर से लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

निर्वाचन प्रक्रिया परिषद के संविधान के अनुसार पूर्ण पारदर्शिता और अनुशासन के साथ सम्पन्न की गई, जिसकी निगरानी निर्वाचन अधिकारी डॉ दुनीचंद शर्मा और संजय झा ने की। कार्यक्रम की शुरुआत में परिषद के महासचिव डॉ अमित शर्मा ने वर्ष 2022 से 2025 तक की कार्य अवधि का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इसके उपरांत निवर्तमान प्रदेशाध्यक्ष डॉ मनोज शैल ने परिषद की उपलब्धियों और कार्यों का उल्लेख करते हुए कार्यकारिणी को औपचारिक रूप से भंग किया और स्वयं को संरक्षक पद हेतु नामित किए जाने के बाद त्यागपत्र सौंपा।

निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान निर्वाचक मंडल ने सर्वसम्मति से स्थानीय विद्यालय के कमलकांत गौतम को नया प्रदेशाध्यक्ष, कांगड़ा के डॉ अमनदीप शर्मा को महासचिव और मंडी के लोकपाल को वित्त सचिव चुना। साथ ही सोलन के ललित शर्मा को पुनः संगठन मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। निर्वाचन अधिकारी डॉ दुनीचंद शर्मा ने सभी नव निर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर सेवानिवृत्त संस्कृत शिक्षक दिनेश शास्त्री तथा बथालंग विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ देवीचंद ठाकुर भी पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहे।

नवनिर्वाचित प्रदेशाध्यक्ष कमलकांत गौतम ने सभी प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि वह परिषद के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और संस्कृत शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि नई कार्यकारिणी समर्पण, संवाद और सहभागिता की भावना के साथ कार्य करेगी।हर संस्कृत शिक्षक का वैचारिक सहयोग लेकर ही रणनीति बनाई जाएगी।

निर्वाचन प्रक्रिया से पूर्व एक सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया, जिसमें अर्की विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय अवस्थी ने राज्य भर से चयनित 19 संस्कृत शिक्षकों को ‘संस्कृत गौरव सम्मान’ और 3 शिक्षकों को ‘संस्कृत सेवा सम्मान’ प्रदान कर उनका अभिनंदन किया। विधायक ने संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भाषा भारतीय संस्कृति, दर्शन और वैज्ञानिक चेतना की मूल आत्मा है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत भाषा युवाओं को नैतिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवींद्र मेहता सहित अनेक शिक्षाविद, अधिकारी और संस्कृत शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन संस्कृत शिक्षा और शिक्षकों के हित में संकल्प के साथ किया गया।





