अर्की के ऐतिहासिक राजमहल परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस, श्रीकृष्ण जन्म पर निकली झांकी से गूंजा कथा पंडाल

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज : उपमंडल अर्की के ऐतिहासिक राजमहल परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। आचार्य संदीपन वशिष्ठ के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य कथाओं का रसपान श्रद्धालुओं को कराया गया, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे।


कथा के दौरान आचार्य संदीपन वशिष्ठ जी ने विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने डाकू अजामिल की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान का स्मरण मनुष्य के जीवन को बदल सकता है और अंत समय में भी भगवान का नाम मोक्ष का मार्ग प्रदान करता है


आचार्य ने वृतासुर तथा हिरण्याक्ष के प्रसंग का भी उल्लेख किया और बताया कि जब पृथ्वी संकट में पड़ गई थी, तब भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को बचाया। इसके साथ ही हिरण्यकश्यपु, भक्त प्रह्लाद और होलिका का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति के आगे अहंकार और अधर्म टिक नहीं सकते। भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यपु का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।


कथा में राजा बलि और भगवान वामन अवतार की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य ने बताया कि भगवान ने वामन रूप धारण कर तीन पग भूमि मांगकर राजा बलि के अहंकार को समाप्त किया और धर्म की स्थापना की। इसके अलावा गजेंद्र मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि संकट के समय भगवान का स्मरण करने से भक्त को अवश्य ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है।


कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया गया। श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन होते ही कथा पंडाल में विशेष उत्साह का माहौल बन गया। इस अवसर पर सुंदर झांकी निकाली गई और पूरा कथा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए।


राजमहल परिसर में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। यह आयोजन बाघल राज परिवार अर्की के सौजन्य से किया जा रहा है।
राजपरिवार की पुत्रवधू मयूराक्षी सिंह ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें और इस पावन धार्मिक आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

LIC

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