दाड़लाघाट में आरएसएस का पथ संचलन, 80 स्वयंसेवकों ने लिया भाग

शताब्दी वर्ष के बाद 101वें वर्ष में प्रवेश पर सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा और सामाजिक समरसता का दिया संदेश।

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से रविवार को दाड़लाघाट नगर में गणवेशधारी स्वयंसेवकों द्वारा पथ संचलन का आयोजन किया गया। इसमें कुल 80 स्वयंसेवकों ने अनुशासन के साथ भाग लिया, जिनमें 20 बाल स्वयंसेवक और 60 अन्य स्वयंसेवक शामिल रहे। कार्यक्रम में शंकर जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक धनीराम जी ने मुख्य वक्ता के रूप में स्वयंसेवकों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में धनीराम जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने तथा 101वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संघ की शताब्दी यात्रा के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए संघर्ष, समर्पण और योगदान का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा तथा धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

संघ के पंच परिवर्तन के अंतर्गत सामाजिक समरसता के विषय पर विचार रखते हुए उन्होंने समाज में आपसी सद्भाव, एकता और समरसता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को अपने सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति सजग रहना चाहिए। उनके अनुसार, आज विश्व भारत की ओर आशा की दृष्टि से देख रहा है और ऐसे समय में देश को अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति निष्ठावान रहते हुए आगे बढ़ना होगा।

धनीराम जी ने हिंदू समाज से संगठित होने का आह्वान करते हुए कहा कि एक सशक्त और संगठित समाज ही राष्ट्र को विश्व गुरु के स्थान पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान गणवेश में स्वयंसेवकों ने अनुशासित ढंग से पथ संचलन किया। कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों ने संगठन, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया। पथ संचलन के माध्यम से समाज में एकता, देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का आह्वान किया गया।

LIC

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