बातल के तरुण ने 19,024 फीट ऊंचे उमलिंग ला तक पहुंचकर दिखाया हिमाचली जज्बा

रॉयल एनफील्ड हिमालयन 450 पर 3 हजार किमी का सफर, 10 दिन में पूरा किया चुनौतीपूर्ण बाइक अभियान।

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- । उपमंडल अर्की की छोटी काशी बातल गांव के रहने वाले तरुण कुमार ने करीब 3,000 किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा पूरी कर 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित उमलिंग ला तक पहुंचकर साहसिक सफर का नया अध्याय जोड़ा है। उन्होंने यह 10 दिवसीय यात्रा रॉयल एनफील्ड हिमालयन 450 पर आठ बाइकर्स के संगठित राइडिंग ग्रुप के साथ पूरी की।


तरुण ने बताया कि यात्रा के दौरान अत्यधिक ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन, शून्य से नीचे तापमान, तेज बर्फीली हवाओं और दुर्गम पहाड़ी रास्तों का सामना करना पड़ा। यात्रा के दौरान लुधियाना से पठानकोट, श्रीनगर, कारगिल और लेह होते हुए पैंगोंग व हानले पहुंचे। सातवें दिन हानले से नुरबुर ला होते हुए उमलिंग ला पहुंचे। इसके बाद देमचोक, न्योमा, त्सो कार, पांग और जिस्पा होते हुए मनाली-कुल्लू के रास्ते लुधियाना लौटे।
उमलिंग ला पहुंचना तरुण के लिए इस अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ाव रहा। उनका कहना है कि 19,024 फीट की ऊंचाई पर सांस लेना भी चुनौतीपूर्ण था, वहीं काकसंग ला, नुरबुर ला और देमचोक के पथरीले व दुर्गम रास्तों ने सफर को और कठिन बनाया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचे।
इस यात्रा का सबसे यादगार पल उमलिंग ला पर 50 पुशअप्स लगाना रहा। फिटनेस के प्रति विशेष रुचि रखने वाले तरुण ने 19,024 फीट की ऊंचाई पर 50 पुशअप्स लगाए। उन्होंने बताया कि इतनी अधिक ऊंचाई और कम ऑक्सीजन के बीच पुशअप्स करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ बेहद यादगार अनुभव रहा।


तरुण का कहना है कि बातल गांव से उमलिंग ला तक मोटरसाइकिल से पहुंचने वाले वे संभवतः पहले राइडर हैं। उमलिंग ला पहुंचने के दौरान उन्होंने बीआरओ के बोर्ड के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।
तरुण की साहसिक मोटरसाइकिल यात्राओं का सिलसिला इससे पहले भी जारी रहा है। वर्ष 2024 में उन्होंने दिल्ली से नेपाल के मुक्तिनाथ तक करीब 2,500 किलोमीटर की 10 दिवसीय बाइक यात्रा एक साथी के साथ पूरी की थी। वहीं वर्ष 2025 में उन्होंने दिल्ली से हणोल होते हुए रोहतांग के रास्ते स्पीति घाटी का करीब 10 दिवसीय सोलो सर्किट पूरा किया।
वर्तमान में दिल्ली में एक बहुराष्ट्रीय परामर्श कंपनी में कार्यरत तरुण कुमार मूल रूप से बातल गांव से हैं। पहाड़ों से गहरे जुड़ाव के साथ उन्हें फिटनेस और मोटरसाइकिलिंग का भी खासा शौक है। वह सोशल मीडिया पर ‘पहाड़ी घुमक्कड़’ नाम से अपनी साहसिक यात्राओं को साझा करते हैं।
तरुण के अनुसार, उमलिंग ला तक पहुंचना उनके लिए केवल एक बाइक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी हिमाचली जड़ों से जुड़े रहते हुए एक कठिन चुनौती को पूरा करने का अनुभव रहा। अपने गांव बातल का नाम इतनी ऊंचाई तक पहुंचाना उनके लिए गर्व का क्षण रहा।

LIC

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