ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज– प्रदेश सरकार ने बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे-मील के साथ सप्ताह में दो बार अतिरिक्त पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के संतुलित विकास और बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।

नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को बुधवार और शुक्रवार को उनकी अथवा उनके अभिभावकों की पसंद के अनुसार उबला हुआ अंडा या ताजा फल उपलब्ध करवाया जाएगा। फल के रूप में केला अथवा सेब दिया जाएगा। इससे पहले विद्यार्थियों को यह पौष्टिक आहार सप्ताह में एक बार उपलब्ध करवाया जाता था।
विद्यालय स्तर पर मिड-डे-मील प्रभारी शिक्षक और कुक-कम-हेल्पर्स विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करेंगे। योजना की निगरानी प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक, केंद्र मुख्य शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समितियों तथा संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
अतिरिक्त पौष्टिक आहार के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री स्कूल स्तर पर स्थानीय बाजार से खरीदी जाएगी। इसमें स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और स्कूल प्रबंधन समितियों का सहयोग लिया जाएगा। योजना के लिए विद्यार्थियों के दाखिले के आधार पर बजट उपलब्ध करवाया जाएगा। विद्यालयों को पौष्टिक आहार पर होने वाले खर्च का अलग रिकॉर्ड रखना होगा और संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से व्यय विवरण प्रस्तुत करना होगा।
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। फलों को विद्यार्थियों को देने से पहले अच्छी तरह साफ किया जाएगा तथा अंडों को उचित रूप से उबालकर उपलब्ध करवाया जाएगा। खाद्य सामग्री की खरीद, भंडारण, तैयारी और वितरण के दौरान निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र कल्याण में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में दो बार दिया जाने वाला अतिरिक्त पौष्टिक आहार नियमित मिड-डे-मील का पूरक होगा और बच्चों के स्वस्थ शारीरिक विकास में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने योजना की प्रभावी निगरानी, सामुदायिक सहभागिता और खाद्य सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया।



