ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़- हिमाचल की छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध बातल गांव की कवयित्री बबीता कौशिक का नया काव्य संग्रह ‘अंतर्मन की गूँज’ प्रकाशित होकर पाठकों के बीच पहुंच गया है। यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और हिमाचली लोकजीवन की सादगी का सजीव दस्तावेज है।

बबीता कौशिक की रचनाओं में हिमाचल की मिट्टी की सोंधी खुशबू, पहाड़ों की पवित्रता और ग्रामीण जीवन की सहजता का सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। उनका मानना है कि जब हृदय की अनुभूतियां शब्दों का रूप लेती हैं, तभी कविता जन्म लेती है। उनका यह नवीन काव्य संग्रह अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है।

संग्रह की कविताओं में कवयित्री के बचपन, अपने पैतृक गांव बातल की स्मृतियों और जीवन के विविध अनुभवों की झलक मिलती है। ‘मेरा बातल गांव’ और ‘बरसात’ जैसी रचनाएं ग्रामीण परिवेश और प्रकृति के सौंदर्य को जीवंत करती हैं, जबकि ‘माँ’ और ‘नारी शक्ति’ जैसी कविताएं नारी के त्याग, संघर्ष और अदम्य साहस को समर्पित हैं।

वहीं ‘अमीर और गरीब’ जैसी रचनाओं में सामाजिक असमानता, मानवीय करुणा और जीवन के यथार्थ को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है। संग्रह की अन्य कविताएं रिश्तों की गरमाहट, देशभक्ति, पारिवारिक मूल्यों और जीवन के विभिन्न पहलुओं को सहज भाषा में पाठकों के सामने रखती हैं।

राज्य पुरस्कृत शिक्षक एवं संपादक पुष्पेन्द्र कौशिक ने इस काव्य संग्रह की सराहना करते हुए कहा कि ‘अंतर्मन की गूँज’ हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब होने के साथ-साथ एक संवेदनशील मन की अभिव्यक्ति भी है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नई पीढ़ी को मानवीय मूल्यों, प्रेम, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करने का कार्य करेगी।




