मनरेगा की जगह प्रस्तावित “विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम” से ग्रामीणों को मिलेगा 125 दिन रोजगार: चुन्नीलाल बंसल

पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

ब्यूरो,दैनिक हिमाचल न्यूज़ – हरिजन सेवक संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष चुन्नीलाल बंसल ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” (VB-G RAM G Act, 2025) को ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित अधिनियम वर्तमान मनरेगा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

बंसल ने जारी बयान में कहा कि प्रस्तावित अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रतिवर्ष 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का प्रावधान किया गया है, जिससे लाखों ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त रोजगार और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।


उन्होंने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार रोजगार की मांग करने वाले व्यक्ति को 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समय में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो संबंधित श्रमिक बेरोजगारी भत्ते का पात्र होगा। इसके अतिरिक्त मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राशि सीधे बैंक अथवा डाकघर खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। भुगतान में देरी होने की स्थिति में मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है।


चुन्नीलाल बंसल ने कहा कि नए अधिनियम में ग्राम पंचायतों की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है। सभी विकास कार्य विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) के तहत तैयार होंगे तथा ग्राम सभा की स्वीकृति के बाद ही क्रियान्वित किए जाएंगे। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करने और जनभागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का निर्माण, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड लगाकर लागत, श्रम दिवस, सामग्री और भुगतान संबंधी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।


बंसल ने बताया कि प्रस्तावित अधिनियम में ठेकेदारों की नियुक्ति और श्रम-विस्थापक मशीनों के उपयोग पर रोक का प्रावधान रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। साथ ही कार्यस्थलों पर पेयजल, छाया, प्राथमिक उपचार और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।


उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना नहीं है, बल्कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और आत्मनिर्भर गांवों के विकास का एक व्यापक दृष्टिकोण है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो इससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और गांवों से होने वाले पलायन पर भी अंकुश लगेगा।


हरिजन सेवक संघ के प्रदेशाध्यक्ष चुन्नीलाल बंसल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रस्तावित अधिनियम के प्रावधानों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

LIC

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