ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज : सहायरात्मज ज्योतिष कार्यालय, बातल छोटी काशी के आचार्य लोकेश कौशिक ने भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार नववर्ष का शुभारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है, जो इस वर्ष 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रहा है।

आचार्य कौशिक के अनुसार इस वर्ष का संवत्सर “रौद्र” रहेगा, जो भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक है और अनुशासन, शक्ति तथा परिवर्तन का संकेत देता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बड़े नीतिगत निर्णय और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि नववर्ष गुरुवार से प्रारंभ होने के कारण इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। गुरु के प्रभाव से शिक्षा, धर्म और आध्यात्मिकता में वृद्धि होगी, जबकि मंगल के कारण सख्त और अनुशासनात्मक निर्णय लिए जा सकते हैं। आचार्य लोकेश कौशिक ने बताया कि विक्रम संवत 2083 की विशेषता यह है कि इसमें ज्येष्ठ का अधिक मास जुड़ने से यह वर्ष 12 के बजाय 13 महीनों का होगा और लगभग 384 दिनों का रहेगा। अधिक मास को दान-पुण्य और साधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

उन्होंने पौराणिक महत्व बताते हुए कहा कि इसी दिन सृष्टि की रचना का आरंभ हुआ था और यह समय प्रकृति में नवचेतना का प्रतीक है। देश के विभिन्न भागों में इस दिन गुड़ी पड़वा, उगादी और चैत्र नवरात्रि जैसे पर्व भी आरंभ होते हैं।

राशिफल के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मिथुन, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए यह वर्ष विशेष रूप से शुभ रहने वाला है, जिसमें करियर और आर्थिक लाभ के प्रबल योग बनेंगे।
आचार्य कौशिक ने कहा कि यह नववर्ष समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक जागरूकता और बदलाव के संकेत लेकर आ रहा है।

