ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज – हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद की राज्यस्तरीय बैठक रविवार को जिला बिलासपुर के घुमारवीं में परिषद के प्रदेशाध्यक्ष कमलकांत गौतम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के दस जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और संस्कृत शिक्षकों व छात्रों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष कमलकांत गौतम ने कहा कि परिषद हमेशा सरकार और शिक्षा विभाग के साथ संवाद के माध्यम से संस्कृत शिक्षा के उत्थान के लिए प्रयासरत रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पदनाम बदलकर ‘टीजीटी संस्कृत’ किया जाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इसका पूर्ण क्रियान्वयन और व्यावहारिक विसंगतियों का समाधान अभी शेष है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई प्रशासनिक निर्णय ऐसे हैं, जिन्हें बिना अतिरिक्त वित्तीय भार डाले तुरंत लागू किया जा सकता है।

बैठक में परिषद ने सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखने का निर्णय लिया। इनमें संस्कृत शिक्षकों को सीएंडवी (C&V) संवर्ग से पूर्ण रूप से मुक्त कर टीजीटी संवर्ग में समान वरिष्ठता का लाभ देना, टीजीटी संस्कृत की राज्यस्तरीय वरिष्ठता सूची का शीघ्र निर्माण, प्रवक्ता व मुख्याध्यापक पदों पर पदोन्नति के लिए स्पष्ट कोटा निर्धारण तथा शेष शिक्षकों को भी समान धारा में लाने के लिए उपयुक्त व्यवस्था करना शामिल है।
परिषद ने यह भी मांग उठाई कि जिन शास्त्री शिक्षकों की नियुक्ति के समय टेट अनिवार्य नहीं था, उन्हें भी पदोन्नति की प्रक्रिया में शामिल किया जाए। साथ ही जो शास्त्री प्रशिक्षित नहीं हैं, उनके लिए ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जाए ताकि वे भी इस धारा में आ सकें।

बैठक के उपरांत आयोजित प्रेस वार्ता में पदाधिकारियों ने कहा कि परिषद अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट है और सरकार व शिक्षा विभाग से सकारात्मक व शीघ्र निर्णय की अपेक्षा करती है। परिषद को विश्वास है कि इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द आवश्यक अधिसूचना जारी की जाएगी।
इस अवसर पर राज्य महासचिव डॉ. अमनदीप शर्मा, वित्त सचिव लोकपाल, संगठन मंत्री ललित शर्मा, संरक्षक सोहनलाल, प्रवक्ता डॉ. अमित शर्मा, उपाध्यक्ष डॉ. पद्मनाभ शर्मा, वेद पराशर सहित राज्य कार्यकारिणी के सदस्य व विभिन्न जिलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।



