एचआरटीसी पेंशनर्स का 30 मार्च को शिमला कूच, मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ घेराव का ऐलान

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज-  हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) से सेवानिवृत कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। हिमाचल पथ परिवहन सेवा निवृत कल्याण मंच ने 30 मार्च 2026 को शिमला में जोरदार प्रदर्शन और घेराव का ऐलान करते हुए प्रदेशभर के पेंशनर्स से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

मंच की इकाई के अध्यक्ष बलवीर चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि 30 मार्च, सोमवार को सुबह 10 बजे सभी पेंशनर्स चौड़ा मैदान में एकत्रित होंगे। इसके उपरांत विधानसभा व सचिवालय का घेराव किया जाएगा। उन्होंने इसे अधिकारों की निर्णायक लड़ाई बताते हुए अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के 18 विभागों से सेवानिवृत कर्मचारियों की विभिन्न इकाइयों को एक मंच पर लाकर संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया है। समिति की ओर से सरकार को 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा जा चुका है, जिसमें एचआरटीसी पेंशनर्स की मांगें चौथे स्थान पर शामिल हैं। इसके बावजूद सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

बलवीर चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार ज्ञापन लेने के बावजूद केवल आश्वासन ही दे रही है। शिमला और धर्मशाला में कई बार प्रदर्शन और घेराव किए जा चुके हैं, लेकिन पेंशनर्स की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

उन्होंने विशेष रूप से एचआरटीसी पेंशनर्स के साथ हो रहे भेदभाव पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य विभागों के कर्मचारियों व पेंशनर्स को 3 प्रतिशत वित्तीय लाभ दिया जा चुका है, यहां तक कि एचआरटीसी के कार्यरत कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल चुका है, लेकिन सेवानिवृत पेंशनर्स को इससे वंचित रखा गया है।

इसके अलावा, पूर्व सरकार के कार्यकाल में घोषित ₹50,000 की राहत राशि भी अभी तक एचआरटीसी पेंशनर्स को नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि कई अन्य वित्तीय लाभ भी हैं, जो अन्य विभागों को मिल चुके हैं, लेकिन एचआरटीसी के सेवानिवृत कर्मचारियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

चौधरी ने सभी पेंशनर्स, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े सेवानिवृत कर्मचारियों से अपील की कि वे 30 मार्च को शिमला पहुंचकर अपनी एकजुटता का परिचय दें। उन्होंने कहा कि इस बार कोई भी घर पर न बैठे और सभी मिलकर इस आंदोलन को सफल बनाएं, ताकि सरकार को उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जा सके।

LIC

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