जो विद्या संस्कृत से प्रारम्भ होती है, वह कभी निष्फल नहीं होती- सौम्या साम्बशिवन

संस्कृत सप्ताह के समापन समारोह में डीआईजी सौम्या साम्बशिवन रही मुख्य अतिथि।।

ब्यूरो,,दैनिक हिमाचल न्यूज- हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद के राज्य प्रवक्ता डॉ अमित शर्मा और राज्य मीडिया प्रभारी कुंदन शर्मा ने बताया कि 6 से 12 अगस्त तक संस्कृत सप्ताह का आयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से हुआ। समापन समारोह में केंद्रीय रेंज मंडी की डीआईजी सौम्या साम्बशिवन मुख्य अतिथि रही।


सौम्या साम्बशिवन ने संस्कृत में शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ईश्वर को प्रत्यक्ष नहीं देखा, परंतु जिस भाषा से ईश्वर का बोध हुआ, वही संस्कृत पूजनीय है। केरल में विद्यारंभ संस्कार के समय चावल पर “ॐ हरि श्री गणपतये नमः अविघ्नमस्तु” मंत्र लिखवाने की परंपरा है। जो विद्या संस्कृत से शुरू होती है, वह कभी निष्फल नहीं होती।


उन्होंने कहा कि संस्कृत असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमृतत्व की ओर ले जाती है। संस्कृत के बिना समाज संस्कारहीन हो जाता है। धर्म, चिकित्सा, योग, न्याय, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों की आधारशिला यही भाषा है। “संस्कृतं रक्षति रक्षितम्” अर्थात संस्कृत की रक्षा से संस्कृति, संस्कार और समाज सुरक्षित रहेंगे। संस्कृत विश्व की एकमात्र भाषा है जिसमें अपशब्द नहीं, और जो इसका अध्ययन करता है वह दुर्व्यसनों का शिकार नहीं हो सकता।

सप्ताह भर चली व्याख्यानमाला में डॉ सत्यदेव, शिवकुमार शिवा, शिवानी, आचार्य धर्म प्रकाश, आचार्य केवल शर्मा और आचार्य राजकुमार ने विषय प्रस्तुत किए। कक्षा 6 से 8 और 9 से 12 के लिए क्विज़ में हजारों छात्रों ने भाग लिया।

समापन पर छात्राओं ने शिव संकल्प सूक्त और शिवतांडव मंत्रों से मंगलाचरण किया। संरक्षक डॉ मनोज शैल ने स्वागत, संगठन मंत्री आचार्य ललित शर्मा ने गतिविधियों का विवरण, प्रदेशाध्यक्ष कमलकांत गौतम ने धन्यवाद, संचालन महासचिव डॉ अमनदीप शर्मा ने और तकनीकी संयोजन डॉ नरेन्द्र राणा ने संभाला। लाइव प्रसारण को सात हजार से अधिक लोगों ने देखा, पसंद और साझा किया।

LIC

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