सरकारी मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों में निराशा।

ब्यूरो,दैनिक हिमाचल न्यूज़:-(दाड़लाघाट) हाल ही में अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके युवा डाक्टरों में आजकल निराशा का माहौल है,जिसकी वजह है सरकार द्वारा उन्हें नौकरी से वंचित रखना।ग़ौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 2016 बैच के युवा डाक्टरों की डिग्री पूरी होने में चार महीने की देरी हो गयी थी।इसी दौरान सरकार ने पहले ही वाक् इन इंटरव्यू करवा दिए थे जिस वक़्त इनकी इंटर्न्शिप चल रही थी तो सरकार ने इन्हें इन साक्षात्कार में भाग लेने से अपरिपक्व करार कर दिया था।अब इन डॉक्टरों की पढ़ाई पूरी होने पर भी इनके वाक् इन इंटरव्यू नहीं करवाएँ जा रहे हैं।इन्होंने अपनी इंटर्नशिप के दौरान भी कैम्पस इंटर्व्यू करवाने की माँग सरकार के सामने कई बार रखी थी जैसा कि पिछले कई सालों से होता आ रहा था पर इन्हें हमेशा निराशा ही हाथ लगी।मुख्यमंत्री ने बजट सत्र में 500 नए डॉक्टरों की नियुक्ति की घोषणा भी की थी लेकिन ज़मीनी स्तर पर इस पर कोई कार्य नहीं हुआ है।सरकार कहती है कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी पूरी हो गयी है तो अब नई नियुक्तियाँ केवल कमीशन की परीक्षा के माध्यम से ही होगी लेकिन इसकी प्रकिया न केवल लम्बी व जटिल होती है,परन्तु इससे केवल कुछ ही डॉक्टरों की नियुक्ति हो पाएगी।प्रदेश में बीते कुछ दिनों में कुल्लू,पालमपुर,जोगिंद्र नगर व सरकाघाट जैसी जगहों पर डॉक्टरों की कमी कि चलते स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध प्रदर्शन की खबरें तो आ ही रही है ऐसे में सरकार द्वारा यह कहना की डॉक्टरों की कमी पूरी हो गयी है,अपने आप में ही काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है।यह हाल अभी है जब सरकार ने पहले से 500 नियुक्तीयों की घोषणा कर रखी है और तीन सरकारी व एक निजी कॉलेज से केवल 450 नए डॉक्टर निकल रहें है।आगामी वर्षों में जब हर साल प्रदेश में 800+ नए डॉक्टर निकलेंगे तो सरकार के पास उनके भविष्य के लिए क्या प्रावधान होगा यह देखने वाली बात होगी क्यूँकि जिन नए मेडिकल कॉलेजों का सरकार इतना बखान करती आ रही है,कहीं वो कल को बेरोज़गार डॉक्टर बनाने के कारख़ाने ना बन जायें।

LIC

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