ब्यूरो//दैनिक हिमाचल न्यूज़:-
(अर्की) अर्की मुख्यालय स्थित गौसदन के सामुदायिक भवन में डॉ हेडगेवार स्मारक समिति शिमला (हि प्र) के तत्वावधान में जिला दाड़लाघाट द्वारा स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के विषय पर एक प्रबुद्धजन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त देवदत्त शर्मा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक डॉ वीरसिंह रांगड़ा रहे । कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

मुख्यातिथि देवदत्त शर्मा ने कहा कि भारत की स्वाधीनता को 15 अगस्त को पूरे 75 वर्ष पूर्ण हो रहे है,इसलिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के आह्वान पर पूरे देश मे इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है ताकि लोगों को देश के महान देशभक्तों के बलिदान और उनकी वीरता से सभी को परिचित करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि हम सभी को ऐसे देशभक्तों के जीवन से प्रेरणा लेने की अति आवश्यकता है जिन्होंने इस देश की आजादी के लिये अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ वीर सिंह रांगड़ा ने कहा कि इस देश का इतिहास दुनिया का प्राचीनतम इतिहास है। उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास व संस्कृति के बारे में बताया कि भारत की आर्थिक स्थिति बहुत ही मजबूत होती थी और जब व्यापार समुद्री रास्ते से किया जाता था तो उस समय दुनिया के कुल व्यापार का 22 प्रतिशत व्यापार अकेले भारत ही करता था। भारत के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि अनेक इतिहासकार व शोधार्थी भी यह मानते है कि हमारा देश ज्ञान,विज्ञान, तकनीक,शौर्य , पराक्रम हर दृष्टि से सुसम्पन्न राष्ट्र था। इस देश के मजबूत समाजिक ताने – बाने को देखते हुए अनेक विदेशी जिज्ञासु भी समय -समय पर यहां आते रहे। देश के प्राचीनतम इतिहास पर इतिहासकार भी यह कहते रहे है कि इस देश मे इतनी सम्पन्नता थी कि किसी भी घर मे ताले नही लगाए जाते थे क्योंकि यहां सभी आर्थिक रूप से सम्पन्न थे।

इस दौरान इस कार्यक्रम में संघ के संघ के जिला संघचालक धनीराम, जिला कार्यवाह,मुकेश कौशिक, विभाग सेवा प्रमुख राजेन्द्र कुमार,जिला सम्पर्क प्रमुख महेंद्र शर्मा, संभव चैरिटेबल संस्था कुनिहार की अध्यक्ष प्रतिभा कंवर,नगर पंचायत अर्की के पार्षद सुरेंद्र शर्मा, कुनिहार के समाजसेवी सुमित मित्तल सहित बहुत से प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
