ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- कुनिहार को नगर पंचायत घोषित किए जाने के फैसले के खिलाफ क्षेत्र में विरोध लगातार तेज हो रहा है। कुनिहार विकास सभा, महिला मंडल कोठी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस निर्णय को जनभावनाओं के विपरीत बताते हुए हाटकोट, कोठी और कुनिहार पंचायतों को नगर पंचायत बनाने की अधिसूचना को तुरंत डिनोटिफाई करने की मांग उठाई है।

कुनिहार विकास सभा के प्रधान धनीराम तंवर के नेतृत्व में कार्यकारिणी सदस्यों—भागमल तंवर, ज्ञान ठाकुर, दीप राम ठाकुर, बाबूराम तंवर, नागेंद्र ठाकुर, संतराम, देवी राम मेहता, ज्ञान गर्ग, सनी राघव, ओम प्रकाश ठाकुर, सोहनलाल, राजेंद्र गर्ग, जगदीश ठाकुर, रामचंद, बलवीर चौधरी और धर्म सिंह—सहित महिला मंडल कोठी व अन्य संस्थाओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सरकार ने बिना स्थानीय लोगों की सहमति के यह निर्णय लिया है, जो पूरी तरह जनभावनाओं के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार सरकार और प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुनिहार अभी भी पूर्णतः ग्रामीण क्षेत्र है, जहां अधिकतर लोग खेती-बाड़ी और पशुपालन पर निर्भर हैं। नगर पंचायत बनने से पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित होगी और लोगों पर टैक्स व अन्य नियमों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

विकास सभा ने आरोप लगाया कि सरकार को राजनीतिक द्वेष से ऊपर उठकर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांगड़ा जोन में कई नगर पंचायतों को जनता के विरोध के बाद डिनोटिफाई किया जा चुका है, जबकि कंडाघाट को भी 23 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा लोगों की मांग पर डिनोटिफाई किया गया। ऐसे में कुनिहार के साथ भेदभाव किए जाने के सवाल भी उठ रहे हैं।
वहीं, क्षेत्र में इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि नगर पंचायत बनने से विकास, सफाई और अन्य सुविधाओं में सुधार हो सकता है, जबकि विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया और जनसहमति के लिया गया कोई भी निर्णय स्वीकार्य नहीं होगा।

इसके साथ ही पंचायत रोस्टर में 5 प्रतिशत अधिकार उपायुक्त (DC) को दिए जाने के मुद्दे पर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे गलत बताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जबकि सरकार इसे कानूनी प्रावधान बता रही है।
संयुक्त बयान में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने समय रहते इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

अंत में कुनिहार विकास सभा और सभी संगठनों ने एक स्वर में मांग की है कि कुनिहार को नगर पंचायत बनाने की अधिसूचना को तुरंत रद्द किया जाए और क्षेत्र को पूर्व की भांति पंचायत व्यवस्था में ही रखा जाए, ताकि लोगों के अधिकार और पारंपरिक ढांचा सुरक्षित रह सके।



