भक्ति के पथ में अहंकार ही सबसे बड़ी बाधा बनता है-शशांक कृष्ण कौशल जी
ब्यूरो , दैनिक हिमाचल न्यूज :- एक भक्त के जीवन में सबसे बड़ी बाधा कोई है तो वो है अहंकार।इसी अहं भाव के कारण ही श्री प्रह्लाद जी का नर-नारायण के साथ युद्ध हुआ।श्री प्रह्लाद जी तीर्थों में दर्शन कर रहे थे पर भीतर का अहंकार अभी भी जागृत था।

अतः आप सब भी कभी तीर्थ में जो तो पहली बात ये कि तीर्थ का सेवन होता है भ्रमण नहीं।तीर्थ के कुछ नियम दिये गये हैं-तीर्थ में कम कहना,कम सोना व कम बोलना चाहिये पर इससे विपरीत तीर्थ में अधिक चलना व अधिक भजन करना चाहिये।एक विशेष नियम के तहत तीर्थ में किसी भी प्रकार से पाप नहीं करना चाहिये अन्यथा वो अखण्ड हो जाता है।ये सब बातें पट्टा बरावरी के प्राचीन श्री दुर्गा माता मंदिर में आयोजित श्रीमद्देवी भागवत कथा के चतुर्थ दिवस विश्वविख्यात कथाव्यास श्री शशांक कृष्ण कौशल जी ने कही।

उन्होंने भगवान कृष्ण के जन्म की कथा से बताया कि भगवान कृष्ण की लीला में सहायता देने के लिये जगदम्बा कई रूपों में आई।श्रीमद्देवी भागवत के अनुसार तो योगमाया,राधा,द्रौपदी,देवकी व रुक्मिणी-ये पाँचों भी जगदम्बा का ही स्वरूप हैं।

गौरतलब है कि पट्टा बरावरी में समस्त ग्रामवासियों के सौजन्य से प्रतिवर्ष कथा का आयोजन किया जाता है जिस श्रृंखला में इस वर्ष देवी कथा का आयोजन किया गया है जिसमें क्षेत्रवासियों का खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

