अर्की के राहु में हिंदू सम्मेलन में सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता पर हुआ मंथन

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज़-  अर्की उपमंडल की ग्राम पंचायत रोहांज–जलाना स्थित भीम मैमोरियल खेल मैदान, राहु में एकदिवसीय हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सामाजिक कुरीतियों पर मंथन करना तथा समाज में आपसी सौहार्द और संस्कारों को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी गोपाल सिंह कौशल ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि के प्रांत संयोजक धर्मपाल शर्मा उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्थानीय मंदिर के महंत किशन पुरी जी महाराज भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वंदे मातरम् के साथ हुआ। सम्मेलन में वक्ताओं ने समाज में बढ़ती कुरीतियों, नशे की प्रवृत्ति और सामाजिक विघटन पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज को एकजुट रहने का आह्वान किया। आयोजन समिति के उपाध्यक्ष जिया लाल शर्मा ने सामाजिक समरसता विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज की मजबूती तभी संभव है जब सभी वर्ग आपसी भेदभाव को त्यागकर एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता से ही एक सशक्त और संस्कारित राष्ट्र का निर्माण हो सकता है।


कृष्णचंद शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होकर योगदान देना चाहिए।


मुख्य वक्ता धर्मपाल शर्मा ने अपने संबोधन में भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति की वैज्ञानिकता और जीवन उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में माता को प्रथम गुरु का स्थान दिया गया है। यदि माताएं स्वयं धर्मग्रंथों का अध्ययन कर बच्चों को संस्कार दें, तो समाज स्वतः सुसंस्कृत बनेगा।
उन्होंने कुटुम्ब प्रबोधन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज की नींव होते हैं।
धर्मपाल शर्मा ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है, और इस अवसर पर संघ का संकल्प है कि समाज को जोड़ने, संस्कारों को सुदृढ़ करने और राष्ट्र निर्माण के कार्य को और अधिक व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।


अपने अध्यक्षीय संबोधन में गोपाल सिंह कौशल ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि यह मानसिक संतुलन, अनुशासन और सकारात्मक सोच का आधार है। उन्होंने सभी से योग को दैनिक जीवन का अंग बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में आयोजन में  रोहांज–जलाना, पलोग और खनलग पंचायतों से सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। उपस्थित जनसमूह ने सनातन धर्म की रक्षा, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

LIC

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