ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- हरिजन सेवक संघ के प्रदेशाध्यक्ष चुन्नीलाल बंसल ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक नीति का मूल्यांकन भावनाओं या प्रतीकों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा के स्थान पर लाए जा रहे ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को इसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

बंसल ने कहा कि बीते वर्षों में मनरेगा के क्रियान्वयन के दौरान मजदूरी भुगतान में देरी, कार्यों की गुणवत्ता और असमान कार्यान्वयन जैसी कई व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आईं। केवल अधिकार आधारित व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध परिणाम और जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उनके अनुसार ‘वीबी जी-राम-जी’ योजना रोजगार को कौशल विकास, आजीविका सृजन और उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में वित्तीय दायित्वों को अधिक स्पष्ट किया गया है तथा परिणाम आधारित वित्तपोषण पर जोर दिया गया है, जिससे राज्यों को बेहतर योजना निर्माण और क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करेगा।

महात्मा गांधी के नाम को लेकर चल रही बहस पर बंसल ने कहा कि किसी योजना का मूल्य उसके नाम से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले ठोस लाभ से तय होता है। यदि कोई कार्यक्रम ग्रामीणों की आय स्थिरता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक उत्थान सुनिश्चित करता है, तो वही वास्तविक अर्थों में जनहितकारी है।
उन्होंने कहा कि सुधारों के साथ मतभेद स्वाभाविक हैं, किंतु बदलती परिस्थितियों में नीतियों का विकास आवश्यक है। उद्देश्य यही होना चाहिए कि सार्वजनिक व्यय को स्थायी ग्रामीण समृद्धि में बदला जाए और कमजोर वर्गों को वास्तविक सशक्तिकरण प्राप्त हो।




