ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज : उपमंडल अर्की के ऐतिहासिक राजमहल परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। आचार्य संदीपन वशिष्ठ के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य कथाओं का रसपान श्रद्धालुओं को कराया गया, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे।

आचार्य संदीपन वशिष्ठ ने कहा कि भागवत कथा रूपी गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य के जीवन की अनेक शंकाएं दूर हो जाती हैं। कथाएं समाप्त नहीं होतीं, बल्कि केवल विराम लेती हैं और मनुष्य को धर्म तथा भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
कथा के दौरान आचार्य ने राजा परीक्षित और शुकदेव मुनि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा सुनाकर उन्हें मोक्ष का मार्ग बताया।

इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। आचार्य ने पूतना प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब पूतना ने बालक कृष्ण को विष पिलाने का प्रयास किया, तब भगवान ने उसका उद्धार कर उसे माँ के समान मुक्ति प्रदान की। इसके साथ ही माखन चोरी लीला, बाल सखाओं के साथ भगवान श्रीकृष्ण के खेल तथा मिट्टी खाने की लीला का भी सुंदर वर्णन किया गया।

कथा में अघासुर वध, ब्रह्मा जी का भ्रम दूर होने तथा कालिया नाग के दमन का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य ने बताया कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए समय-समय पर अपनी दिव्य लीलाओं का प्रकट करते हैं।

इस दौरान देवधार मंदिर सेरीघाट के मुख्य पूजारी मनोहरलाल गर्ग, मुख्य गुर राजेन्द्र शर्मा तथा प्रसिद्ध कथा वाचक नर्वदेश गौतम भी कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करने पहुंचे।

राजमहल परिसर में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। यह आयोजन बाघल राज परिवार अर्की के सौजन्य से किया जा रहा है।





