ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- हरिजन सेवक संघ के प्रदेश अध्यक्ष चुन्नीलाल बंसल ने कहा कि हाल ही में सेंट्रल ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद से यह साफ हो गया है कि देश में ट्रेड यूनियन आंदोलन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां हड़तालें व्यापक जनसमर्थन के साथ बड़े जनआंदोलन का रूप लेती थीं, वहीं अब उनका असर सीमित क्षेत्रों तक सिमटता नजर आ रहा है।

उन्होंने कहा कि आज देश की लगभग 85 से 90 प्रतिशत कार्यशक्ति असंगठित क्षेत्र में काम कर रही है। बड़ी संख्या में लोग स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय, ठेका प्रणाली और गिग इकॉनमी से जुड़े हैं। ऐसे में पारंपरिक यूनियन मॉडल, जो बड़ी फैक्ट्रियों और स्थायी नौकरियों पर आधारित था, अब पूरी कार्यशक्ति का प्रतिनिधित्व नहीं कर पा रहा है।

बंसल ने कहा कि आम लोगों के लिए बार-बार के बंद और हड़तालें कई बार असुविधा और आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं। दिहाड़ी मजदूर, छोटे दुकानदार और आम यात्री सीधे प्रभावित होते हैं। इसलिए समय की मांग है कि यूनियनें केवल विरोध तक सीमित न रहें, बल्कि रचनात्मक सुझावों और संवाद के जरिए श्रमिक हितों की रक्षा करें।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर नई आर्थिक संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में श्रमिकों की सुरक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार पर ठोस नीति आधारित पहल जरूरी है। ट्रेड यूनियनों को भी बदलते समय के अनुसार अपनी भूमिका तय करनी होगी, ताकि श्रमिक कल्याण और राष्ट्रीय विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकें।



