हिट एंड रन कानून वापस ले केंद्र सरकार :सुशील ठाकुर

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज:- भारतीय न्याय संहिता 2023 में हुए संशोधन के बाद अब हिट एंड रन के मामलों में नियम सख्त हो गए हैं। नए नियम के तहत हिट एंड रन के केस में वाहन चालक पर 7 लाख रुपये तक का जुर्माना और 10 साल तक कैद का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान का दाड़लाघाट के वरिष्ठ ट्रांसपोर्टर सुशील ठाकुर ने विरोध किया है। दाड़लाघाट में पत्रकारों को जारी बयान में वरिष्ठ ट्रांसपोर्टर सुशील ठाकुर ने बताया कि यह नियम आने के बाद भारी वाहन चालक अपनी नौकरियां छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

ठाकुर ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता 2023 में एक्सीडेंट में दोषी वाहन चालकों को 10 साल की सजा का प्रावधान है,जो कि हमारे परिवहन उद्योग को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सड़क परिवहन बिरादरी भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत हिट एंड रन के मामलों पर प्रस्तावित कानून के तहत कठोर प्रावधानों के संबंध में सहमति नहीं जताती है। सुशील ठाकुर ने नए प्रावधान को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करते हुए कहा कि हिट एंड रन के मामलों में कड़े कदम उठाने की जरूरत जरूर है,जो कानून प्रस्तावित है उसमें कई सारी खामियां हैं।

जिन पर दोबारा सोचने की जरूरत है। ठाकुर ने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान परिवहन क्षेत्र और ट्रक चालकों का है,ऐसे में इस कानून के संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर समूचा संगठन सकते में है। ठाकुर ने कहा कि प्रस्तावित कानून बिना किसी परामर्श और स्टेकहोल्डर की सहमति से पेश किया गया है,जिसे बिना जमीनी हकीकत जाने लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवहन उद्योग और वाहन चालक भारत की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण पहिए है। भारत इस वक्त वाहन चालकों की कमी से जूझ रहा है,लेकिन सरकार का इस और कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में 10 साल की सजा के प्रावधान के बाद अब ट्रक ड्राइवर नौकरी छोड़ने को मजबूर हो रहे है।

उन्होंने चिंता जताई कि भारत में एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन प्रोटोकॉल का अभाव है और ऐसे मामलों में जब कोई एक्सीडेंट होता है, तो बिना किसी जांच के बड़े वाहन चालक की गलती करार दी जाती है। यह नहीं देखा जाता की गलती बड़े वाहन चालक की है या छोटे वाहन चालक की। हिट एंड रन के मामलों को लेकर उन्होंने कहा कि चालक दुर्घटना की जिम्मेदारी से बचने के इरादे से नहीं भागता बल्कि बेकाबू होती भीड़ और खुद की जान बचाने के लिए वह संभावित खतरे को देखते हुए अपनी जान बचाने के लिए भागता है। ऐसे में उस पर सजा का प्रावधान और जुर्माना लगाना ठीक नहीं है। सुशील ठाकुर ने केन्द्र सरकार से तुरंत प्रभाव से इस कानून को वापस लेने की मांग की है।

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