ताराबाई भोसले की ऐतिहासिक समाधि को संरक्षण की दरकार, सतारा में मराठा वीरांगना की विरासत संजोने की आवश्यकता

ब्यूरो, दैनिक हिमाचल न्यूज- महाराष्ट्र के सतारा जिले के महुली क्षेत्र में स्थित मराठा साम्राज्य की वीरांगना महारानी ताराबाई भोसले की समाधि ऐतिहासिक महत्व का प्रमुख स्थल है, जिसे और अधिक व्यवस्थित संरक्षण व संवर्धन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।


ताराबाई भोसले, मराठा शासक छत्रपति राजाराम भोसले की पत्नी तथा छत्रपति शिवाजी महाराज की पुत्रवधू थीं। वर्ष 1700 में राजाराम भोसले के निधन के बाद, जब उनके पुत्र शिवाजी द्वितीय नाबालिग थे, तब ताराबाई ने रानी रीजेंट के रूप में शासन की बागडोर संभाली।


यह कालखंड मराठा साम्राज्य के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। मुगल सम्राट औरंगज़ेब दक्कन में सक्रिय अभियान चला रहे थे। ऐसे कठिन समय में ताराबाई ने दृढ़ नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता और प्रभावी सैन्य रणनीति के माध्यम से मराठा शक्ति को संगठित बनाए रखा। उनके नेतृत्व में मराठा सेनाओं ने छापामार युद्धनीति अपनाकर मुगल सेना को निरंतर चुनौती दी।


प्रख्यात इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने भी अपने लेखन में उल्लेख किया है कि 1700 से 1707 के बीच मराठा साम्राज्य को संकट से उबारने में ताराबाई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
स्थानीय स्तर पर समय-समय पर समाधि स्थल के संरक्षण के प्रयास हुए हैं, किन्तु ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसके समग्र विकास और नियमित देखरेख की आवश्यकता बनी हुई है। इतिहास में उनके योगदान को व्यापक रूप से रेखांकित करना और आने वाली पीढ़ियों तक उनके साहस व नेतृत्व की गाथा पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।
मराठा साम्राज्य के संघर्षपूर्ण दौर में ताराबाई का नेतृत्व भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे सहेजना और सम्मान देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

LIC

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